Dwarika Dham Your Guide | Dwarika Budget trip | Dwarika | Darshan Gujrati
नमस्कार साथियों मैं आपको द्वारिका के बारे में बताने जा रहा हूं तो जैसा कि आप सभी को पता है कि द्वारिका गुजरात का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल है और हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है और द्वारिका चार धामों में से एक प्रमुख धाम माना जाता है और यहां पर धार्मिक प्रवृत्ति वाले लोग अपनी आस्था और श्रद्धा से यहां पर दर्शन करने के लिए आते हैं। इस पोस्ट में आपको द्वारिका में जाने व आने से लेकर संपूर्ण जानकारियां देने वाला हूं तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़े। आपको बताऊंगा कि आप द्वारिका कैसे पहुंचेंगे व द्वारिका में रुकने भोजन करने और घूमने की कौन-कौन सी जगह है यह सारी जानकारियां आपको इस पोस्ट में मिलेगी।
https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjlHwbMLX9BiYGaFQ3rgxDafOhrt8_22ESgKmLSoZn-bFHYMYqbnmZ-jI6883rTNc9Enr3PhlafmPK9dcfsRlHpp6sF0gSoBkaIWb0Nq3kXtzZTlqnRIsTJNOcdhb9d6dqc3wpCL9Ho3g/s660/images+%252810%2529.jpeg
Dwarakadhish Darshan Toor Plan
साथियों बात करे द्वारिका जाने के लिए साधन की तो द्वारिका आने के लिए हमारे पास तीन साधन उपलब्ध है
How to Reach Dwarika Dham gujrat
रेल मार्ग
प्रथम की बात कर तो प्रथम है रेलवे स्टेशन और यह सबसे सस्ता और अच्छा साधन माना जाता है यहां द्वारिका आने के लिए क्योंकि दोस्तों द्वारिका के अंदर ही रेलवे का जंक्शन बनाया गया हैं अगर आप के आस पास या आपके शहर से ट्रेन द्वारका के लिए आती है तो सबसे अच्छा यही मार्ग माना गया है। और अगर द्वारिका के लिए कोई भी ट्रेन नहीं है तो फिर द्वारिका के नजदीकी रेलवे स्टेशन राजकोट तक आकर उससे आगे आप सरकारी बसों के माध्यम से द्वारिका पहुंच सकते हैं। और अगर बात करें द्वारिका के आसपास सबसे बड़े शहर की तो सबसे बड़ा से अहमदाबाद है और अगर आप किस शहर से अहमदाबाद के लिए कोई भी ट्रेन है तो आप अहमदाबाद तक आ सकते हैं अहमदाबाद से क्रॉस ट्रेन पकड़कर आप द्वारिका के लिए निकल सकते हैं। क्योंकि दोस्तों अहमदाबाद से द्वारका के लिए प्रतिदिन ट्रेनें जाती हैं
सड़क परिवहन
अब अगर बात करें दूसरे साधन या रास्ते की तो दूसरा रास्ता है कि आप रोड के माध्यम से आ सकते हैं। यानी कि आप सड़क परिवहन के माध्यम से द्वारिका पहुंच सकते हैं और दोस्तों द्वारिका आने के लिए आप किसी भी सरकारी या निजी बस में आ सकते हैं या फिर अपना पर्सनल वाइकल या गाड़ी लेकर भी आ सकते हैं। बात करेंगे आने के रास्ते की तो आप पहले अहमदाबाद उसके बाद राजकोट और उसके बाद द्वारिका पहुंच सकते हैं। और अगर आप डायरेक्ट आना चाहते हैं तो अहमदाबाद से डायरेक्ट बसे मिल जाएंगी द्वारिका आने के लिए यहां से आकर आप द्वारिका के लिए बस पकड़ सकते हैं और पहुंच सकते हैं कृष्ण नगरी द्वारिका के अंदर।
हवाई यातायात
और बात करें तीसरे साधन या रास्ते की तो तीसरा ऑप्शन है फ्लाइट । दोस्तों के रामपुर रेल या सड़क परिवहन के माध्यम से ना आकर फ्लाइट के माध्यम से आना चाहते हैं तो भी आ सकते हैं । साथियों द्वारिका से नजदीकी एयरपोर्ट पोरबंदर है और अगर आपके शहर के आसपास से पोरबंदर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट है तो आप पोरबंदर आकर फिर आगे सरकारी या निजी भाई कल से द्वारिका तक आ सकते हैं । और बात करें पोरबंदर से द्वारका की दूरी तो इन दोनों स्थानों के मध्य 100 किलोमीटर की दूरी है और यह दूरी आप किसी भी बस या गाड़ी से पार कर सकती हैं।
Dwarikadham Live Darshan
अब बात करें द्वारिका आने के बाद आपको कहां-कहां पर घूमना है और द्वारकाधीश के दर्शन कैसे करने हैं। साथियों दर्शन करने से पहले आपको गोमती घाट जो कि द्वारिका मंदिर के जस्ट पीछे ही बना हुआ है उसमें आपको स्नान करना चाहिए क्योंकि यह मान्यता है कि गोमती घाट में स्नान करने के बाद पवित्र होने के पश्चात आप द्वारकाधीश के दर्शन करें तो बहुत ही शुभ माना जाता है। और गोमती घाट द्वारका धीश के मुख्य मंदिर के जस्ट पीछे ही बना हुआ है तो आप वहां पर स्नान करें और उसके बाद ही मंदिर में दर्शन करें। क्योंकि साथियों वहां जाने वाली लोगों की मान्यता है कि सबसे पहले गोमती घाट में स्नान करने के बाद ही द्वारिकाधीश के दर्शन करना शुभ माना जाता है । गोमती घाट में स्नान करने के पीछे की मान्यता है कि यहां पर गोमती नदी और समुद्र का मिलाप होता है तो इसलिए यह जगह शुभ मानी जाती है । यहां पर गोमती नदी का संगम माना जाता है और इस संगम पर स्नान करना शुभ माना गया है। साथी गोमती घाट के अंदर ही घूमती माता का मंदिर बना हुआ है तो उस स्नान करने के बाद एक बार गोमती माता मंदिर के दर्शन तो जरूर करें और अपनी श्रद्धा से माता का दर्शन करें। द्वारकाधीश मंदिर के आस पास बहुत सारे छोटे बड़े मंदिर है तो वहां पर भी एक बार जरूर दर्शन कर लेवे क्योंकि सारे मंदिर द्वारकाधीश जाने की कृष्ण भगवान से संबंधित है और वहां पर कृष्ण भगवान की सारी यादें जुड़ी हुई है।
Dwarika Dham complete information
अब तो बात करें द्वारकाधीश के मुख्य मन्दिर की तो मुख्य मंदिर में दो द्वार है और दोनों द्वारा के अलग-अलग नाम है एक द्वार का नाम है मोक्ष द्वार और दूसरे का नाम है स्वर्गद्वार। और द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने के लिए आपको मुख्य द्वार यानी स्वर्ग द्वार से प्रवेश करना है और द्वारकाधीश के दर्शन करने हैं। द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करते वक्त मोबाइल या अन्य किसी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक आइटम ले जाना मना है इसलिए आप मंदिर ट्रस्ट की तरफ से बने हुए लॉकर में अपना सामान और इलेक्ट्रॉनिक आइटम आदि रख सकते हैं और वहां पर रखने के बाद आप द्वारकाधीश के मंदिर में दर्शन कर सकती है। सामान रखने का यह लोग कर द्वारकाधीश मंदिर ट्रस्ट की तरफ से बिल्कुल निशुल्क है तो यहां पर सामान रखने के बाद आप सामान का टोकन ले सकते हैं और फिर आप मंदिर की तरफ परेशान कर सकते हैं। दोस्तों आपको मंदिर में जाने के बाद द्वारकाधीश के दर्शन करने हैं। मुख्य मंदिर परिसर के अंदर ही छोटे बड़े बहुत सारे मंदिर हैं जैसे रुकमणी माता का मंदिर आदि इन सभी के दर्शन भी करना जरूरी है तो आप वहां जाने के बाद दिन का भी दर्शन एक बार जरूर कर लेना। साथियों पर आपको द्वारकाधीश की आरती में सम्मिलित ना है जो की आरती बहुत ही सुपर जाती है तो बात करें द्वारकाधीश मंदिर की आरती किसको यह 8 दिन में दो बार होती है एक होती है सुबह को 7:00 बजे और एक होती है शाम के ज्ञानी संध्या समय में 6:30 इन दोनों समय में किसी भी एक समय में आपको आरती में सम्मिलित हो सकते हैं।
द्वारिका धाम में रुकने की व्यवस्था
अब तो बात करते हैं द्वारिका में रुकने की व्यवस्था के बारे में तो द्वारिका में रुकने के लिए बहुत सारी रास्ता है की गई है और यहां पर अनेक धर्मशाला और होटल उपलब्ध है जो यहां आने वाले टूरिस्ट के लिए l रुकने की व्यवस्था उपलब्ध करवाती हैं। आप रोकने के लिए भी तीन आप्शन उपलब्ध है और तीन ऑप्शन अलग-अलग प्रकार के हैं कुछ सोचते हैं कुछ मीडियम है और कुछ महंगे भी हैं और आप अपने बजट के अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकते हैं रोकने के लिए।
धर्मशाला
Yha सबसे सस्ता माध्यम है यहां पर रात्रि विश्राम यार रुकने के लिए। मंदिर परिसर के नजदीक में ही बहुत सारी धर्मशालाएं बनी हुई है कुछ अधिक समाज के लिए धर्मशाला बनी हुई है तो यहां पर आप आसानी से रुक सकते हैं और वह भी बिल्कुल कम बजट में। और बात का धर्मशाला में रूकने के स्कूल की तो एक रात के 300 से लगाकर ₹500 तक का धर्मशाला का शुल्क होता है जो कि बिल्कुल ही सूटेबल और सामान्य प्राइस है। और धर्मशाला में बहुत सारी अच्छी फैसिलिटी भी उपलब्ध होती है या पर स्नान करने रुकने तक सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध है तो आसानी से यहां पर कहर सकते हैं।
गेस्ट हाउस
साथ ही बात करें यहां पर अपने के दूसरे माध्यम की तो यहां पर गेस्ट हाउस का नाम आता है और द्वारकाधीश मंदिर की तरफ से यहां पर यात्रियों के रुकने के लिए गेस्ट हाउस बनाए गए हैं और जो सारी सुविधा युक्त हैं और बात करेंगे द्वारकाधीश ट्रस्ट की तरफ से बने हुए गेस्ट हाउस में रुकने की सुनती तो एक रात के ₹500 से लेकर ₹700 तक का यहां शुल्क रहता है। और यह गेस्ट हाउस द्वारकाधीश के मुख्य मंदिर के बिल्कुल नजदीक में बने हुए होते हैं।
होटल
अब तक तो बात करें तीसरे ऑप्शन या तीसरे माध्यम की तो यहां पर रुकने के लिए मंदिर ट्रस्ट के आस-पास ही बहुत सारे प्राइवेट होटल बने हुए हैं तो वहां पर आसानी से रुक सकते हैं और यहां पर आपको सारी सुविधाएं उपलब्ध होती है। द्वारिका में 200 से ज्यादा होटल बने हुए हैं तो आपको आसानी से होटल में रुकने की व्यवस्था उपलब्ध हो जाएगी। और बात करें होटल में रुकने की शुल्क की तो यहां पर ₹500 से लगाकर ₹1000 तक का शुल्क रहता है इनका एक रात के रुकने के लिए तो वह देकर आसानी से यहां पर होटल में रुक सकते हैं।
द्वारिका धाम में खाने की व्यवस्था
द्वारकाधीश में बात करें खाने की व्यवस्था की तो यहां पर खाने के लिए 2 माध्यम बनाए गए हैं एक माध्यम सस्ता है और दूसरा थोड़ा महंगा भी है तो दोस्तों दोनों के बारे में हमने आपको नीचे बता रखा है तो कृपया उनको पढ़ें
प्रथम मध्यम (सस्ता)
साथ में बात करें द्वारकाधीश में खाने के लिए सबसे सस्ता माध्यम तो वह है मंदिर ट्रस्ट की तरफ से बना प्रसादालय ।
यहां पर प्रति व्यक्ति ₹20 के शुल्क से आप आसानी से खाना खा सकते हैं भर पेट । यहां पर ₹20 की रसीद कटवा कर एक व्यक्ति को भरपेट एक समय का खाना खा सकता है और खाने में भी काफी अच्छी क्वालिटी होती है। यह पागल ये द्वारिकाधीश मंदिर की तरफ से संचालित है। और मंदिर ट्रस्ट की तरफ से संचालित गोदावरी का समय भी निश्चित है और यह 9 दिन में दो बार खुलता है और बात करें सुबह के खुलने की तो यह 12:00 से लगाकर 2:00 तक लगता है और शाम के टाइम से बजे लगाकर 10:00 बजे तक खुला रहता है।
दूसरा माध्यम ( महंगा)
दोस्तो बात करें यहां पर खाने की दूसरा ऑप्शन की तो यहां पर द्वारकाधीश मंदिर के आस पास बहुत सारे रेस्टोरेंट और होटल से बने हुए हैं जो यहां पर खाने की काफी अच्छी व्यवस्था उपलब्ध कराते हैं। और यहां पर हर किस्म के खाना मिलता है। और बात करें यहां पर खाने की स्कूल की तो यहां पर पट्टी थाली ₹100 से लगा कर आ जा रुपए तक की खाने की व्यवस्था उपलब्ध है आप अपने हिसाब से किसी भी रेस्टोरेंट में जाकर खाना खा सकते हैं।
द्वारिका धाम कब जाए ?
दोस्त बात करें द्वारका जाने के समय की तो आप किसी भी समय जा सकते हैं लेकिन वह सबसे अच्छा समय दिसंबर से लेकर जनवरी या फरवरी माह तक रहता है क्योंकि दोस्तों इस समय यहां पर बिल्कुल भी भीड़ कम रहती हैं और रुकने करने की व्यवस्था के दाम भी कम लगते हैं। और इस समय आप यहां कृष्ण भगवान के दर्शन आसानी से कर सकते हैं।
द्वारिका में घूमने की जगह
साथ ही बात करें द्वारिका के आसपास घूमने की जगह की तो मैंने मलिक जगह है जहां पर आप आसानी से घूम सकते हैं।
पंच नंदा तीर्थ
दोस्त बात करें पंचनंदा मंदिर जाने के लिए मंदिर परिषद के जस्ट पीछे गोमती घाट के ऊपर बने सुदामा सेतु को पार करने के बाद जा सकते हैं। और दोस्तों यहां पर जाने के लिए सुदामा सेतु नाम के बीज को पार करना पड़ता है और यहां पर जाने के लिए ₹10 का एंट्री टिकट लगता है। सरपंच नंदन तीर्थ में 5 कुंड बने हुए हैं और यहां पर 5 गुंडों का जल पीना शुभ माना जाता है। कंचना नेतृत्व में पांचो पांडव के नाम से अलग-अलग कुंड बनाए गए हैं और इन कुंडों का जल के स्वाद भी अलग अलग है।
वहां पर वहां पर एक लक्ष्मी नारायण मंदिर भी है तथा मंदिर के पास एक दुर्वासा मुनि जी का एक पेड़ है उसको जरूर देख कर आएगा । और उसके पास एक गुफा भी है और गुफा से निकलते ही और पांचों पांडवों के चरण वाला मंदिर भी बना हुआ है।

0 टिप्पणियाँ